प्रस्तावना : यह केवल नियम नहीं, एक सोच है
यह विद्यालय केवल ईंट, सीमेंट और कमरों से बना भवन नहीं है।
यह वह स्थान है जहाँ एक बच्चा अज्ञान से ज्ञान,
अराजकता से अनुशासन,
और डर से आत्मविश्वास की यात्रा करता है।
हर सुबह जब बच्चा विद्यालय की चौखट लांघता है,
तो वह अपने घर से निकलकर
एक बड़े परिवार — विद्यालय परिवार — में प्रवेश करता है।
इस परिवार को सही ढंग से चलाने के लिए
जैसे देश को संविधान चाहिए,
वैसे ही विद्यालय को भी
एक स्पष्ट, मजबूत और न्यायपूर्ण संविधान की आवश्यकता होती है।
📖 अध्याय 1 : विद्यालय का उद्देश्य – हम बच्चों को क्या बनाना चाहते हैं
हमारा उद्देश्य केवल यह नहीं है कि
बच्चा कक्षा पास कर ले,
या परीक्षा में अंक ले आए।
हम चाहते हैं कि जब बच्चा इस विद्यालय से निकले, तो वह—
समय का सम्मान करना जानता हो
बड़ों से बात करने का सलीका रखता हो
गलत और सही में अंतर समझता हो
आत्मनिर्भर हो
और जहाँ भी जाए, लोग कहें —
“यह बच्चा अच्छे स्कूल से पढ़ा है।”
इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर
हर नियम, हर सुविधा और हर अनुशासन बनाया गया है।
🏫 अध्याय 2 : विद्यालय द्वारा दी जाने वाली सुविधाएँ – और उनसे जुड़ी जिम्मेदारी
विद्यालय बच्चों को बहुत कुछ देता है —
लेकिन हर सुविधा के साथ
एक जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है।
2.1 शिक्षक – सबसे बड़ी सुविधा
विद्यालय ने योग्य, अनुभवी और मेहनती शिक्षक नियुक्त किए हैं।
ये शिक्षक केवल पढ़ाने नहीं आते,
ये बच्चों का भविष्य गढ़ने आते हैं।
👉 इसलिए विद्यार्थियों से अपेक्षा है कि:
शिक्षक की बात ध्यान से सुनें
बीच में बात न काटें
असहमति हो तो शालीनता से रखें
शिक्षक का अपमान
केवल व्यक्ति का नहीं,
ज्ञान का अपमान माना जाएगा।
2.2 कक्षा कक्ष (Classroom) – एक पवित्र स्थान
कक्षा कोई शोर मचाने की जगह नहीं,
यह सीखने का मंदिर है।
इसलिए:
कक्षा में शांति रखी जाएगी
बिना अनुमति सीट से उठना मना है
डेस्क, बेंच, बोर्ड को नुकसान पहुँचाना
विद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुँचाना माना जाएगा
जो बच्चा कक्षा को गंदा करता है,
वह अपने ही भविष्य को गंदा करता है।
2.3 पढ़ाई की व्यवस्था और सपोर्ट सिस्टम
विद्यालय में:
नियमित टेस्ट लिए जाते हैं
कमजोर बच्चों को अतिरिक्त मार्गदर्शन दिया जाता है
परीक्षा से पहले रिवीजन कराया जाता है
👉 लेकिन याद रखें:
विद्यालय मदद कर सकता है,
मेहनत बच्चे को खुद करनी होगी।
🕒 अध्याय 3 : समय की पाबंदी – जीवन का पहला अनुशासन
समय का पालन करना
विद्यालय का सबसे महत्वपूर्ण नियम है।
जो बच्चा रोज़ देर से आता है,
वह धीरे-धीरे
जीवन में भी देर करने लगता है।
3.1 विद्यालय आने का नियम
विद्यालय समय से पहले पहुँचना अनिवार्य है
प्रार्थना सभा में उपस्थित रहना आवश्यक है
देर से आने वाले विद्यार्थियों से कारण पूछा जाएगा
बार-बार देर से आने पर:
पहले चेतावनी
फिर अभिभावक को सूचना
आवश्यकता पड़ने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई
3.2 अनुपस्थिति की प्रक्रिया (बहुत स्पष्ट नियम)
अगर बच्चा विद्यालय नहीं आ सकता, तो:
अभिभावक को पहले सूचना देनी चाहिए
वापस आने पर विद्यालय डायरी / पंचांग में लिखित कारण देना अनिवार्य है
बिना कारण छुट्टी:
अनुशासनहीनता मानी जाएगी
👉 याद रखें:
75% उपस्थिति से कम = परीक्षा में समस्या
👕 अध्याय 4 : वर्दी – समानता और पहचान का प्रतीक
विद्यालय की वर्दी यह बताती है कि—
यह बच्चा किस स्कूल का है
और किस अनुशासन से जुड़ा है।
4.1 वर्दी पहनने का तरीका
वर्दी साफ और प्रेस की हुई हो
जूते पॉलिश किए हुए हों
मोज़े सही हों
गंदी वर्दी =
अनुशासन के प्रति लापरवाही
4.2 व्यक्तिगत सौंदर्य (Personal Grooming)
विद्यालय फैशन शो नहीं है।
इसलिए:
लड़कों के बाल छोटे और सलीके से
लड़कियों के लंबे बाल चोटी में
नाखून छोटे
मेकअप, गहने, नेल पॉलिश वर्जित
यह नियम बच्चों को
अनुशासन और सादगी सिखाने के लिए है।
🪪 अध्याय 5 : पहचान पत्र – सुरक्षा की पहली सीढ़ी
हर विद्यार्थी को रोज़:
अपना पहचान पत्र (ID Card) पहनना अनिवार्य है
बिना पहचान पत्र:
विद्यालय परिसर में प्रवेश कठिन हो सकता है
यह नियम बच्चों की सुरक्षा के लिए है,
दबाव के लिए नहीं।
📚 अध्याय 6 : पढ़ाई, गृहकार्य और ईमानदारी
पढ़ाई का मतलब केवल किताब खोलना नहीं,
पढ़ाई का मतलब है नियमित अभ्यास।
6.1 गृहकार्य
गृहकार्य समय पर करना अनिवार्य
अधूरा या न किया गया गृहकार्य
सीखने में बाधा है
6.2 नकल – सबसे बड़ा अपराध
नकल करने वाला बच्चा
खुद को धोखा देता है।
इसलिए:
नकल पर सख्त कार्रवाई
दोबारा मौका नहीं
🗣️ अध्याय 7 : भाषा, संवाद और अंग्रेज़ी सीखने की पूरी कहानी
जब कोई बच्चा पहली बार अंग्रेज़ी बोलने की कोशिश करता है,
तो उसके मन में डर होता है —
“गलती हो गई तो क्या होगा?”
हमारा विद्यालय इस डर को तोड़ना चाहता है।
7.1 विद्यालय की सोच
विद्यालय यह मानता है कि—
अंग्रेज़ी कोई डर नहीं है
अंग्रेज़ी केवल एक भाषा है
और भाषा बोलने से आती है, चुप रहने से नहीं
इसलिए विद्यालय में बच्चों को
धीरे-धीरे, प्यार से, आत्मविश्वास के साथ
अंग्रेज़ी बोलने के लिए प्रेरित किया जाता है।
7.2 व्यवहारिक नियम
कक्षा में सरल अंग्रेज़ी प्रयोग करने का प्रयास
गलत अंग्रेज़ी पर हँसना मना है
शिक्षक बच्चों को सुधारेंगे, शर्मिंदा नहीं करेंगे
घर पर भी अभिभावक बच्चों को बोलने के अवसर दें
👉 यह नियम बच्चों को
भविष्य के इंटरव्यू, नौकरी और आत्मविश्वास के लिए तैयार करता है।
🏫 अध्याय 8 : कोचिंग, अतिरिक्त पढ़ाई और स्कूल की मर्यादा
विद्यालय समझता है कि
हर बच्चा एक जैसा नहीं होता।
कुछ बच्चों को:
ज़्यादा अभ्यास चाहिए
ज़्यादा समय चाहिए
8.1 विद्यालय की सुविधा
विद्यालय:
कक्षा में ही कॉन्सेप्ट क्लियर करता है
अतिरिक्त सहायता देता है
परीक्षा से पहले रिवीजन कराता है
8.2 स्पष्ट और सख्त नियम
विद्यालय के किसी भी शिक्षक से
निजी ट्यूशन लेना या देना सख्त मना हैविद्यालय परिसर में
कोचिंग या निजी पढ़ाई की बात करना भी अनुचित है
यह नियम:
शिक्षक और विद्यार्थी के बीच
सम्मान और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए है।
🛡️ अध्याय 9 : सुरक्षा, अनुशासन और निषिद्ध वस्तुएँ
विद्यालय एक सुरक्षित क्षेत्र है।
यहाँ बच्चों का ध्यान केवल पढ़ाई और विकास पर होना चाहिए।
9.1 क्या लाना मना है
मोबाइल फोन
स्मार्ट वॉच
हेडफोन
अनावश्यक इलेक्ट्रॉनिक सामान
यदि कोई बच्चा यह सामान लाता है:
सामान ज़ब्त किया जाएगा
अभिभावक को बुलाया जाएगा
9.2 सुरक्षा का नियम
बिना अनुमति विद्यालय छोड़ना मना है
अजनबी से बात करना मना है
किसी समस्या में तुरंत शिक्षक को बताना अनिवार्य है
यह नियम बच्चों की जान और भविष्य की सुरक्षा के लिए हैं।
🚨 अध्याय 10 : बदमाशी, रैगिंग और डर का अंत
बदमाशी एक छोटी चीज़ नहीं है।
यह किसी बच्चे के मन को तोड़ सकती है।
10.1 विद्यालय की नीति
रैगिंग पर शून्य सहनशीलता
मज़ाक और अपमान में अंतर समझाया जाएगा
शिकायत करने वाले को कभी दोषी नहीं माना जाएगा
10.2 शिकायत की प्रक्रिया
अगर किसी बच्चे के साथ:
डराया जाए
मज़ाक उड़ाया जाए
शारीरिक या मानसिक चोट पहुँचाई जाए
तो:
तुरंत शिक्षक या प्रधानाचार्य को बताए
शिकायत गुप्त रखी जाएगी
दोषी पर सख्त कार्रवाई होगी
👉 विद्यालय चाहता है कि
हर बच्चा निडर होकर स्कूल आए।
⚖️ अध्याय 11 : अनुशासन, दंड और सुधार की पूरी प्रक्रिया
अनुशासन का मतलब सज़ा नहीं होता।
अनुशासन का मतलब होता है — सुधार।
11.1 सुधार की सीढ़ियाँ
मौखिक चेतावनी
लिखित चेतावनी
अभिभावक से मुलाकात
सुधार कार्य (Extra Responsibility)
आवश्यकता पड़ने पर निलंबन
हर कदम पर बच्चे को
समझाया जाएगा, तोड़ा नहीं जाएगा।
👨👩👧 अध्याय 12 : अभिभावक – विद्यालय के सबसे बड़े साझेदार
बच्चा दिन का आधा समय स्कूल में
और आधा समय घर में रहता है।
अगर स्कूल और घर अलग दिशा में चलेंगे,
तो बच्चा भ्रमित होगा।
12.1 अभिभावकों से अपेक्षा
डायरी / पंचांग के संदेश पढ़ना
हस्ताक्षर करना
बिना सुने शिकायत न करना
शिक्षक से सम्मानपूर्वक बात करना
12.2 अनुशासन में सहयोग
अगर विद्यालय किसी बात पर ध्यान दिलाता है,
तो वह बच्चे के भले के लिए होता है।
विद्यालय और अभिभावक
एक ही टीम हैं।
🌱 अध्याय 13 : नैतिक मूल्य – असली शिक्षा
अंक ज़िंदगी बना सकते हैं,
पर संस्कार ज़िंदगी चलाते हैं।
विद्यालय बच्चों को सिखाता है:
सत्य बोलना
बड़ों का सम्मान
छोटों से प्रेम
स्वच्छता
राष्ट्र और समाज के प्रति जिम्मेदारी
🏅 अध्याय 14 : पुरस्कार, सम्मान और प्रोत्साहन – मेहनत की पहचान
विद्यालय यह मानता है कि
अनुशासन और मेहनत को
देखा, सराहा और सम्मानित किया जाना चाहिए।
14.1 सम्मान क्यों ज़रूरी है?
जब किसी बच्चे की तारीफ़ होती है,
तो उसका आत्मविश्वास बढ़ता है।
वह दूसरों के लिए उदाहरण बनता है।
14.2 विद्यालय में दिए जाने वाले प्रमुख सम्मान
विद्यालय समय-समय पर निम्नलिखित सम्मान प्रदान करता है:
अनुशासन सम्मान
– सबसे शालीन, नियमों का पालन करने वाला विद्यार्थी100% उपस्थिति सम्मान
– पूरे सत्र बिना अनुपस्थिति के आने वाले विद्यार्थीशैक्षणिक उत्कृष्टता सम्मान
– पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थीसर्वश्रेष्ठ सुधार सम्मान
– जो बच्चा पहले कमजोर था, पर मेहनत से आगे बढ़ाआदर्श विद्यार्थी सम्मान
– व्यवहार, पढ़ाई और अनुशासन में संतुलन रखने वाला विद्यार्थी
👉 ये सम्मान बच्चों को
ईर्ष्या नहीं, प्रेरणा देना सिखाते हैं।
⚖️ अध्याय 15 : विद्यार्थी के अधिकार और कर्तव्य – संतुलन की कहानी
हर विद्यार्थी के अधिकार हैं,
लेकिन हर अधिकार के साथ
कर्तव्य भी जुड़ा है।
15.1 विद्यार्थी के अधिकार
सम्मानपूर्वक व्यवहार पाने का अधिकार
सुरक्षित वातावरण का अधिकार
अपनी बात शालीनता से रखने का अधिकार
बिना डर के सीखने का अधिकार
15.2 विद्यार्थी के कर्तव्य
विद्यालय नियमों का पालन
शिक्षकों का सम्मान
सहपाठियों के साथ सहयोग
विद्यालय की संपत्ति की रक्षा
👉 अधिकार और कर्तव्य
दोनों एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं।
📜 अध्याय 16 : विद्यालय अनुशासन परिषद (Discipline System)
विद्यालय में अनुशासन बनाए रखने के लिए
एक स्पष्ट और निष्पक्ष प्रणाली होती है।
16.1 निर्णय प्रक्रिया
हर गलती की जाँच होगी
बच्चे की बात सुनी जाएगी
बिना सुने सज़ा नहीं दी जाएगी
16.2 सुधार का अवसर
विद्यालय यह मानता है कि
हर बच्चा सुधर सकता है,
अगर उसे सही दिशा दी जाए।
✍️ अध्याय 17 : विद्यार्थी संविधान शपथ
हर विद्यार्थी इस शपथ को
विद्यालय में पढ़ेगा और मानेगा:
“मैं प्रतिज्ञा करता/करती हूँ कि
मैं अपने विद्यालय के संविधान का
पूरी ईमानदारी से पालन करूँगा/करूँगी।
मैं समय का सम्मान करूँगा/करूँगी,
अपने शिक्षकों और साथियों का आदर करूँगा/करूँगी,
विद्यालय की गरिमा बनाए रखूँगा/रखूँगी
और एक जिम्मेदार नागरिक बनूँगा/बनूँगी।”
👨👩👧 अध्याय 18 : अभिभावक की शपथ
“मैं यह स्वीकार करता/करती हूँ कि
मैं विद्यालय और शिक्षक के साथ
पूर्ण सहयोग करूँगा/करूँगी।
मैं अपने बच्चे को
अनुशासन, संस्कार और मेहनत का महत्व समझाऊँगा/समझाऊँगी।”
🌍 अध्याय 19 : विद्यालय की पहचान – बाहर भी, अंदर भी
विद्यालय केवल
चारदीवारी तक सीमित नहीं होता।
विद्यार्थी:
सड़क पर
बाज़ार में
सोशल मीडिया पर
जहाँ भी जाए,
वह विद्यालय का प्रतिनिधि होता है।
इसलिए:
भाषा संयमित हो
व्यवहार शालीन हो
कार्य ऐसा हो कि विद्यालय को गर्व हो
🌅 अध्याय 20 : अंतिम संदेश – एक सपना, एक जिम्मेदारी
प्रिय विद्यार्थियों,
तुम्हारे हाथ में
केवल किताब नहीं,
अपना भविष्य है।
विद्यालय तुम्हें रास्ता दिखा सकता है,
लेकिन चलना तुम्हें खुद होगा।
अनुशासन तुम्हें बाँधता नहीं,
वह तुम्हें मज़बूत बनाता है।
📜 समापन संकल्प
“हम विद्यालय का नाम रोशन नहीं करेंगे,
हम ऐसा आचरण करेंगे
कि विद्यालय खुद हम पर गर्व करे।”